FIITJEE के कई सेंटर बंद, 11 लोगों पर FIR दर्ज, छात्रों और पैरेंट्स की बढ़ी चिंता
उत्तर प्रदेश के नोएडा और गाजियाबाद समेत देश भर में प्रसिद्ध कोचिंग इंस्टीट्यूट FIITJEE के कई सेंटर्स अचानक बंद हो गए हैं. बताया जा रहा है कि शिक्षकों को महीनों से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया, जिसके चलते संस्थान के कई शाखाओं पर ताले लग गए.
FIITJEE के मालिक समेत 11 लोगों पर FIR दर्ज
छात्रों के माता-पिता की शिकायत पर नोएडा पुलिस ने FIITJEE के चेयरमैन डीके गोयल, CFO राजीव बब्बर, COO मनीष आनंद और ग्रेटर नोएडा शाखा के प्रमुख रमेश बतलेश समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
दिल्ली के FIITJEE केंद्र पर 250 से अधिक लोगों ने धोखाधड़ी और कुप्रबंधन के आरोप लगाए हैं. संस्थान ने बंद का कारण प्रबंध भागीदारों का कुप्रबंधन बताया और प्रतिस्पर्धियों पर फैकल्टी अपहरण का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की घोषणा की.
पैरेंट्स की चिंता और गुस्सा
कोचिंग सेंटर के अचानक बंद होने से हजारों अभिभावकों और छात्रों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. एक अभिभावक ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चे की कोचिंग के लिए 3.25 लाख रुपये का भुगतान किया था. अब कोचिंग बंद होने के बाद उन्हें पैसे वापस मिलने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही.
एक अन्य अभिभावक ने कहा कि अब दूसरी कोचिंग संस्थान से कॉल आ रही है, जो दावा कर रही है कि उनके पास FIITJEE की फैकल्टी है. हमारे बच्चे दो संस्थानों के बीच फंस गए हैं.
छात्रों के भविष्य पर असर
11वीं कक्षा में पढ़ने वाली एक छात्रा के पिता ने कहा कि जेईई की परीक्षा पास है, और इस समय कोचिंग का बंद होना बच्चों के लिए बड़ा झटका है. हमें नहीं पता कि पढ़ाई कैसे जारी होगी.
FIITJEE का बचाव और दावा
FIITJEE प्रबंधन ने कहा है कि शिक्षकों के अचानक इस्तीफे के कारण क्लासेज बंद हुई हैं, लेकिन जल्द ही व्यवस्था को सामान्य कर दिया जाएगा. हालांकि, अभिभावकों का कहना है कि उन्हें प्रबंधन पर भरोसा नहीं है.
पुलिस की कार्रवाई जारी
नोएडा पुलिस ने कहा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है. पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर आरोपी पक्ष ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
शिक्षकों का पक्ष
FIITJEE के एक पूर्व शिक्षक ने बताया कि पिछले एक साल में उन्हें समय पर वेतन नहीं मिला. उन्होंने कहा कि पांच महीने का वेतन अभी भी बकाया है. हमने कई बार प्रबंधन से भुगतान की मांग की, लेकिन उन्हें भी कोई स्पष्टता नहीं थी. इसी वजह से हमें मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा.
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