मनसे प्रमुख राज ठाकरे के निर्देश के बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मराठी भाषा के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाया
महाराष्ट्र में बैंकों के सारे कामकाज मराठी में किए जाने की मांग को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने राज्य में आंदोलन शुरू कर दिया है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे के निर्देश के बाद मराठी भाषा के मुद्दे पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आक्रामक रुख अपना लिया है। मुंबई, ठाणे, पुणे आदि जिलों में मनसे के नेता बैंकों में जाकर ज्ञापन सौंप रहे है। इस बीच ठाणे जिले के अंबरनाथ शहर में बैंक ऑफ महाराष्ट्र (Bank of Maharashtra) की शाखा में एक गैर-मराठी ब्रांच मैनेजर द्वारा मराठी नहीं आने की बात कहने पर मनसे कार्यकर्ताओं ने वहां जमकर हंगामा किया। साथ ही मनसे कार्यकर्ताओं ने ब्रांच मैनेजर को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने बैंकिंग के कामकाज में मराठी का उपयोग नहीं किया तो वह मनसे-स्टाइल में इसका जवाब देंगे। इस दौरान मनसे कार्यकर्ताओं ने ब्रांच मैनेजर के साथ बदसलूकी भी की।
मनसे का कहना है कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की नई गाइडलाइंस के अनुसार, बैंकों को ग्राहकों से मराठी में संवाद करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी को लेकर मनसे के अंबरनाथ शहराध्यक्ष कुणाल भोईर, शहर संघटक स्वप्निल बागुल और विद्यार्थी सेना जिलाध्यक्ष धनंजय गुरव पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैंक ऑफ महाराष्ट्र की अंबरनाथ शाखा पहुंचे, तो वहां के ब्रांच मैनेजर शर्मा ने कहा कि उन्हें मराठी नहीं आती। इस पर मनसे कार्यकर्ताओं ने उनसे कहा कि अगर मराठी नहीं आती तो वह अपने राज्य में चले जाए और वहां नौकरी करें। मनसे कार्यकर्ताओं द्वारा मराठी में बात करने के लिए कहे जाने पर बैंक मैनेजर ने कहा कि अगर उन्हें कोई शिकायत है तो पुणे की मुख्य शाखा में जाकर कहें। इस जवाब से गुस्साए कार्यकर्ताओं ने बैंक मैनेजर की केबिन में हंगामा कर दिया और चेतावनी दी।
उन्होंने कहा, “हम पब्लिक सर्वेंट हैं, हमें देश में कहीं भी काम करने का अधिकार है। किसी भी भाषा को सीखने में समय लगता है। अगर कल मुझे तमिलनाडु जाना पड़े तो मुझे तमिल सीखनी होगी। इसके लिए समय लगता है। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
सीएम ने कार्रवाई की बात कही
इस बीच, मनसे के मराठी भाषा को लेकर चल रहे आंदोलन पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी है। पत्रकारों के सवाल पर उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में मराठी भाषा के लिए आंदोलन करना गलत नहीं है। सरकार भी मानती है कि मराठी का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए। लेकिन अगर कोई कानून अपने हाथ में लेता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
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