गरीबी और संघर्ष के बावजूद फुटबॉल की दुनिया में चमकती 15 साल की सुहानी, पिता के निधन के बाद मां की मेहनत ने खोला जर्मनी का रास्ता
शहडोल: जिले की 15 साल की सुहानी कोल जर्मनी के FC Ingolstadt 04 क्लब में फुटबॉल ट्रेनिंग के लिए चुनी गई हैं। वह उन पांच युवा खिलाड़ियों में से एक हैं जिन्हें यह मौका मिला है। सुहानी ने बचपन में पिता को खोया, लेकिन फुटबॉल के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। अब वह अपने कोच लक्ष्मी साहीस के साथ जर्मनी जा रही हैं। यह ट्रेनिंग 4 से 12 अक्टूबर तक चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस गांव के फुटबॉल प्रेम की तारीफ की थी।
6 साल की उम्र में पिता की हत्या
सुहानी का जीवन मुश्किलों भरा रहा है। छह साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता की हत्या देखी। इस घटना से उन्हें गहरा सदमा लगा। उनके पैतृक परिवार ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद सुहानी अपनी नानी के घर बिचारपुर गांव में रहने लगीं। इस गांव को अब 'मिनी ब्राजील' भी कहते हैं क्योंकि यहां फुटबॉल का बहुत क्रेज है। सुहानी ने इन मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी। अब वह जर्मनी में एडवांस फुटबॉल ट्रेनिंग के लिए जा रही हैं।
बीयर्सडॉर्फर देंगे सुहानी को कोचिंग
जर्मनी के मशहूर कोच और पूर्व बुंडेसलीगा खिलाड़ी डाइटमार बीयर्सडॉर्फर सुहानी को ट्रेनिंग देंगे। सुहानी 10वीं क्लास की छात्रा हैं और गोलकीपर के तौर पर चुनी गई हैं। उन्होंने चार स्कूल-नेशनल टूर्नामेंट में भी खेला है। सुहानी कहती हैं, 'मैं अपने पिता को हर दिन याद करती हूं, लेकिन फुटबॉल मुझे ताकत देता है।' उनका सपना देश के लिए खेलना और अपने गांव का नाम रोशन करना है।
कपड़े बेचती हैं मां
सुहानी की मां उनके लिए ताकत का स्तंभ हैं। वह पड़ोस में कपड़े बेचकर परिवार का गुजारा करती हैं। उनकी मां ने हमेशा सुहानी को हिम्मत दी है। सुहानी को अपनी पहली हवाई यात्रा याद है। वह मुंबई वीजा के लिए गई थीं। उन्होंने बताया, 'मैंने हवाई जहाज को सिर्फ आसमान में उड़ते देखा था। उसके अंदर कदम रखना जादू जैसा लगा।' मध्य प्रदेश खेल विभाग ने सुहानी को लगभग 50,000 रुपये की फुटबॉल किट दी है। इसमें 10,000 रुपये के दो जोड़ी जूते भी शामिल हैं। सुहानी इस किट को बहुत संभाल कर रखती हैं। वह कहती हैं, 'मैं अपने जूतों को बार-बार साफ करती हूं। वे मेरे लिए अनमोल हैं क्योंकि जीवन हमेशा संघर्ष और कमी से भरा रहा है।'
पीएम मोदी की पहल
यह पहल PM नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम के बाद हुई है। इसमें उन्होंने कोच डाइटमार बीयर्सडॉर्फर की तारीफ की थी। डाइटमार बिचारपुर के युवा आदिवासी फुटबॉलरों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। मोदी ने अमेरिकी रिसर्चर लेक्स फ्रिडमैन के साथ एक पॉडकास्ट में बिचारपुर की फुटबॉल संस्कृति पर बात की थी। इसके बाद ही जर्मन कोच की इसमें दिलचस्पी बढ़ी। बिचारपुर गांव को 2003 से 'मिनी ब्राजील' कहा जाता है। यहां लगभग हर घर में एक फुटबॉल खिलाड़ी या कोच है। इस गांव में करीब 1,000 फुटबॉलर हैं। सुहानी के साथ सानिया कुशवाहा (14), प्रीतम कुमार (14), वीरेंद्र बैगा (16) और मनीष घासीया (16) भी जर्मनी गए हैं। ये सभी अपने समुदाय की उम्मीदों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जा रहे हैं।
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