बिहार में 1951 के बाद सबसे अधिक मतदान, चुनाव आयोग ने कहा- “लोकतंत्र की जीत”
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया है, जो 1951 के बाद सबसे अधिक भागीदारी वाला चुनाव बना। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने इस उपलब्धि को भारतीय लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया और कहा, “बिहार ने देश को रास्ता दिखाया है। यह 1951 के बाद सबसे ज्यादा मतदान है — शुद्ध मतदाता सूची और पारदर्शी चुनाव प्रणाली लोकतंत्र की जीत का उदाहरण हैं।”
पर्यवेक्षकों का मानना है कि सीईसी की “लोकतंत्र जीतता है” टिप्पणी कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया आरोपों के जवाब में एक अप्रत्यक्ष संदेश थी, जिन्होंने चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” के आरोप लगाए थे। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है, जो वर्तमान में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है।
बिहार के मतदाताओं को उनकी उत्साही भागीदारी के लिए सीईसी ने बधाई दी और चुनाव कर्मियों की पारदर्शी कार्यप्रणाली की सराहना की।
गुरुवार को हुए पहले चरण में 64.66% मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के चुनावी इतिहास का सर्वाधिक प्रतिशत है।
जिलों में मुजफ्फरपुर (70.96%), समस्तीपुर (70.63%), और बेगुसराय (68.26%) शीर्ष पर रहे, जबकि पटना में सबसे कम 48.69% मतदान दर्ज हुआ। इस चरण में कुल 1,314 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें 122 महिलाएं शामिल थीं।
चुनाव आयोग ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे, जिनमें 15 बटालियन पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। सभी बूथों से वेबकास्टिंग की व्यवस्था और 926 महिला-प्रबंधित व 107 दिव्यांग-प्रबंधित मतदान केंद्रों ने पारदर्शिता की नई मिसाल पेश की।
बिहार ने इस बार न सिर्फ मतदान प्रतिशत का रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि “लोकतंत्र अब भी जीवंत है और जनता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है।”
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