जल संकट की चेतावनी: शहरों की बढ़ती मुश्किलें और भविष्य की चुनौती
नई दिल्ली। जल संकट को लेकर हो रहे शोध और आने वाली रिपोर्ट काफी डराने वाली हैं। नीति आयोग की एक रिपोर्ट ने पहले ही आगाह किया था कि वर्ष 2030 तक भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी के पास स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होगी। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहर अब दुनिया के सबसे अधिक जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों की सूची में शामिल हो गए हैं। कई इलाकों में स्थिति इतनी विकट है कि लोग पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर निर्भर हैं और अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं।
हाल के वर्षों में बेंगलुरु से आई खाली बर्तनों के साथ टैंकरों का इंतजार करते लोगों की तस्वीरों ने इस समस्या की भयावहता को जगजाहिर किया है। इससे पहले वर्ष 2019 में चेन्नई भी इसी तरह के भीषण संकट का सामना कर चुका है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि शहरों में पानी की यह किल्लत अब केवल गर्मियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि एक स्थायी संकट का रूप ले चुकी है। शहरी जल संकट के पीछे अनियंत्रित भूजल दोहन, जर्जर जल आपूर्ति ढांचा, झीलों-तालाबों का विलुप्त होना और तेजी से बढ़ता शहरीकरण मुख्य कारण हैं। बोरवेल के जरिए जमीन के भीतर का जल स्तर लगातार गिर रहा है, वहीं पुरानी पाइपलाइनों में रिसाव के कारण बड़ी मात्रा में पानी व्यर्थ बह जाता है।इस समस्या के समाधान के लिए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अर्थ्स फ्यूचर जर्नल में एक नवीन मॉडल का सुझाव दिया है। पुणे शहर के उदाहरण से यह बताया गया है कि यदि किसानों को सिंचाई के अतिरिक्त पानी को विनियमित टैंकर नेटवर्क के माध्यम से शहरी परिवारों को बेचने की कानूनी अनुमति दी जाए, तो पानी की लागत में भारी कमी आ सकती है। शोध के अनुसार, सही नीतियों के क्रियान्वयन से कुल जल आपूर्ति में मात्र एक प्रतिशत की वृद्धि करके भी हर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 40 लीटर पानी उपलब्ध कराया जा सकता है। स्पष्ट है कि जल संरक्षण और प्रभावी प्रबंधन ही इस संकट का एकमात्र स्थायी समाधान है।वैश्विक अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2050 तक दुनिया की आधी शहरी आबादी जल संकट की चपेट में होगी, जिसमें भारतीय शहरों की संख्या सर्वाधिक हो सकती है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के मुताबिक, यदि वर्तमान हालात नहीं सुधरे तो कम आय वाले शहरी परिवारों को अपनी कुल कमाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा केवल पानी खरीदने पर खर्च करना पड़ सकता है।
संबोधन की तैयारी: महिला आरक्षण बिल पर देश को आगे की रणनीति बता सकते हैं पीएम मोदी
अभिभावकों को बड़ी राहत: राज्य सरकार ने RTE एडमिशन के लिए दिया 10 दिन का अतिरिक्त समय
ईरान के फैसले का असर: सप्लाई की चिंता खत्म होते ही कच्चा तेल सस्ता, अब भारत पर टिकी सबकी नजर।
कंकाल बन गई जिंदगी: नीमच में कुपोषण और प्रताड़ना की शिकार महिला का रेस्क्यू
World Heritage Day 2026: विरासत के संरक्षण का संकल्प, आइए देखें दुनिया के ये 7 अजूबे।
₹1,00,000 करोड़ का प्रोजेक्ट: मुंबई के गोरेगांव में 10 साल में तैयार होगी 'अदाणी सिटी'।
योगी आदित्यनाथ की हुंकार: घुसपैठियों से मुक्त बंगाल ही मां का सच्चा सपना
18वीं लोकसभा का सातवां सत्र संपन्न: 9 विधेयक पारित, लेकिन संविधान संशोधन बिल अटका
तेहरान के कड़े तेवर: अमेरिकी नाकेबंदी के विरोध में जलडमरूमध्य बंद करने की धमकी