बंगाल की राजनीति में नया सियासी खेल: घुसपैठियों के मुद्दे पर BJP-ममता टकराव
West Bengal Elections 2026: देश के 5 राज्यों में अगले कुछ दिनों के भीतर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. हालांकि सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल में इन दिनों सियासी पारा हाई है. तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से जमकर बयानबाजी देखने को मिल रही है. बीजेपी आरोप लगा रही है कि बांग्लादेश में घुसपैठियों का कब्जा है. यहां बड़ी संख्या में घुसपैठिए मौजूद हैं. चुनाव के बीच एक्टर और बीजेपी नेता मिथुन चक्रवर्ती ने कहा ने कहा ‘जब तक मेरे बदन में एक बूंद खून रहेगा तब तक कोई माई का लाल पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश नहीं बना सकता.’ बीजेपी बंगाल में घुसपैठ वाले मामले को चुनावी मुद्दा बनाने में लगी हुई है.
मिथुन चक्रवर्ती ने कहा कि सीमापार से होने वाला अवैध आवागमन स्थानीय रोजगार के मौकों पर सीधे तरह से असर डालता है. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में सीमित संसाधन हैं, वहां भी अचानक से आबादी बढ़ रही है. इसका सीधा असर वहां के स्थानीय लोगों पर पड़ता है. उनको नौकरियां और दैनिक मजदूरी के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है.
बंगाल की राजनीति में एक्टिव हुए मिथुन
विशेष गहन पुनरावृति (SIR) को लेकर बंगाल में शुरुआत से ही जमकर बवाल देखने को मिल रहा है. सीएम ममता आरोप लगाती रहीं हैं कि बीजेपी और चुनाव आयोग ने मिलकर राज्य में बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं. हालांकि बीजेपी हमेशा ही ममता पर राजनीति करने के आरोप लगाती रही है.
SIR को लेकर TMC की तरफ से उठाए जा रहे सवाल पर मिथुन ने कहा कि बीजेपी वोटरों के नाम भी बड़ी संख्या में काटे गए हैं. जिस तरह के आरोप टीएमसी की तरफ से लगाए जा रहे हैं कि यह पूरी तरह से गलत हैं. उन्होंने सीएम ममता पर मदरसों को पैसा देने का आरोप भी लगाया है. मिथुन ने कहा कि बंगाल में इतनी गन्दगी फैल चुकी है कि झाड़ू लेकर साफ़ करना पड़ेगा. इस बार शैतान जाग उठा है. इस बार परिवर्तन होना चाहिए और अगर नहीं हुआ तो आप भी जायेंगे और में भी जाऊंगा.
घुसपैठ को मुद्दा बना रही बीजेपी
भारतीय जनता पार्टी शुरुआत से ही सीएम ममता पर घुसपैठियों को पनाह देने का आरोप लगाती रही है. प्रदेश के स्थानीय नेता हों या फिर दिल्ली में बैठे नेता, सबका घुसपैठ के मुद्दे पर एक ही रुख है. हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बीजेपी की तरफ से पश्चिम बंगाल में TMC के 15 साल के शासन पर 35 पन्नों का ‘श्वेत पत्र’ जारी किया. इसके में कुल मिलाकर पांच मुद्दों को उठाया गया था. श्वेत पत्र’ में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच 2,216.7 किमी लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा में से 569 किमी हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है. जिससे घुसपैठ को बढ़ावा मिला.
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया था कि राज्य सरकार वोट बैंक बनाने के लिए घुसपैठियों को फर्जी पहचान पत्र लेने में मदद कर रही है. जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन पर असर पड़ा.बीजेपी लगातार इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही है, जबकि टीएमसी इन आरोपों को खारिज करती रही है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तेज होने के आसार हैं.
बंगाल चुनाव में कांटे की टक्कर
बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और टीएमसी के बीच ही मुख्य मुकाबला है. इस चुनाव के जरिए बीजेपी अपना आखिरी किला जीतने की कोशिश में लगी है. साल 2021 के विधानसभा चुनावों में भले ही बीजेपी को बंगाल से अच्छा रिस्पांस मिला हो, लेकिन लोकसभा चुनाव में कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी. उस समय बीजेपी ने महज 12 सीटों जीतीं थीं. हालांकि पार्टी वहां लंबे समय से एक्टिवा बनी हुई है. ऐसे में इस बार के चुनाव नतीजों में देखना होगा कि बीजेपी बंगाल के लोगों का दिल जीत पाती है या फिर लोग एक बार फिर अपना भरोसा सीएम ममता पर ही दिखाते हैं.
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