विक्टोरिया अस्पताल की भूमि पर अतिक्रमण से मचा हड़कंप
जबलपुर: शहर के प्रतिष्ठित सेठ गोविंददास विक्टोरिया जिला चिकित्सालय की करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के निशाने पर है। अस्पताल की लगभग 10 एकड़ की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जों का जाल लगातार फैलता जा रहा है, जिससे न केवल अस्पताल की भविष्य की योजनाओं पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि शासन की मुस्तैदी पर भी सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासनिक महकमों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद बने हुए हैं।
बेखौफ अतिक्रमणकारी और अस्पताल प्रबंधन की लाचारी
विक्टोरिया अस्पताल के विशाल परिसर का एक बड़ा हिस्सा वर्तमान में खाली पड़ा है, जहां अस्पताल के वार्ड क्रमांक 5 और 6 के पीछे के इलाके सहित धोबी घाट और गुरुद्वारे के समीपवर्ती क्षेत्रों में धड़ल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और तस्वीरों से यह साफ जाहिर होता है कि कब्जा करने वाले लोग अब अस्पताल की बाउंड्रीवॉल के बिल्कुल करीब पहुंच चुके हैं। इस स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने अपनी चिंताओं से जिला प्रशासन को अवगत कराया है, क्योंकि यदि यह अवैध गतिविधियां समय रहते नहीं रोकी गईं, तो सार्वजनिक उपयोग की यह महत्वपूर्ण भूमि पूरी तरह निजी कब्जों की भेंट चढ़ जाएगी।
पत्राचार का लंबा सिलसिला और प्रशासन की चुप्पी
अवैध कब्जे की इस गंभीर समस्या को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय द्वारा निरंतर पत्राचार किया जा रहा है, जिसमें जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और नगर निगम आयुक्त को कई बार लिखित शिकायतें भेजी गई हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, सबसे पहले दिसंबर 2024 में इस मामले को प्रमुखता से उठाया गया था, जिसके बाद हाल ही में अप्रैल के अंत में फिर से एक रिमाइंडर पत्र भेजा गया है। प्रशासन को भेजी गई इन शिकायतों की एक प्रति न्यायिक मजिस्ट्रेट को भी प्रेषित की गई है, ताकि इस मामले की गंभीरता को समझा जा सके। इसके बावजूद, अब तक मौके पर किसी भी तरह की बेदखली की कार्रवाई का न होना तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
सरकारी संपत्ति की सुरक्षा पर सिविल सर्जन के कड़े तेवर
सिविल सर्जन डॉ. नवीन कोठारी ने इस पूरे प्रकरण पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा है कि एक सरकारी अस्पताल की जमीन का सुरक्षित न रह पाना प्रशासनिक व्यवस्था की बड़ी विफलता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल की जमीन की सुरक्षा के लिए वे हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं और संबंधित विभागों को साक्ष्यों सहित सूचित कर दिया गया है। अब गेंद पूरी तरह से जिला प्रशासन और नगर निगम के पाले में है कि वे कब फाइलों से बाहर निकलकर धरातल पर सक्रिय होते हैं और इस बेशकीमती शासकीय भूमि को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराते हैं, ताकि आने वाले समय में अस्पताल के विस्तार में कोई बाधा न आए।
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