UNSC में आज बड़ा मंथन संभव, अमेरिका-बहरीन प्रस्ताव पर दुनिया एकजुट
न्यूयॉर्क / दुबई: दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वैश्विक मंच पर हलचल तेज हो गई है। इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित और खुला रखने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) मंगलवार को एक बेहद अहम आपात बैठक बुला सकती है। यह पूरी कवायद बहरीन और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए एक विशेष प्रस्ताव पर चर्चा के लिए की जा रही है। इस वैश्विक प्रयास की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे दुनिया भर के 129 से ज्यादा देशों का खुला समर्थन मिल चुका है। पिछले हफ्ते तक यह संख्या 112 थी, लेकिन अब सोमालिया और कांगो जैसे देशों ने भी इसके पक्ष में आकर इसे और मजबूती दी है, जो वर्तमान में सुरक्षा परिषद के सक्रिय सदस्य भी हैं।
वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को बचाना मुख्य लक्ष्य
इस दूरगामी प्रस्ताव को बहरीन और अमेरिका के अलावा कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे प्रमुख खाड़ी देशों का भी मुख्य प्रायोजन हासिल है। इसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से सुरक्षित और बाधारहित बनाना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों, प्रमुख व्यापारिक रास्तों और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में कोई व्यवधान न आए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के परमाणु केंद्रों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद ही बहरीन ने इस आपातकालीन बैठक की मांग को तेजी से आगे बढ़ाया है।
ईरान की हरकतों पर अमेरिकी विदेश मंत्री का तीखा प्रहार
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि ईरान अपनी आक्रामक धमकियों और हरकतों से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने ईरान पर सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि वह समुद्री रास्तों को बाधित कर रहा है, जहाजों पर हमले करवा रहा है, अंतरराष्ट्रीय पानी में घातक बारूदी सुरंगें बिछा रहा है और वहाँ से गुजरने वाले जहाजों से अवैध रूप से टैक्स वसूलने का प्रयास कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर तैयार इस प्रस्ताव में बेहद सख्त लहजे में मांग की गई है कि ईरान अपने हमलों और बारूदी सुरंगें बिछाने के काम को तुरंत रोके, साथ ही वह उन सभी ठिकानों को भी उजागर करे जहाँ उसने सुरंगें बिछाई हैं ताकि उन्हें हटाने में वैश्विक सहयोग मिल सके।
ईरान का पलटवार और राष्ट्रपति ट्रंप का कूटनीतिक रुख
दूसरी तरफ, ईरान ने इस अमेरिकी प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसकी तीखी आलोचना की है। ईरानी प्रशासन का कहना है कि अमेरिका इस संकट का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदों के लिए कर रहा है और अपने गैर-कानूनी फैसलों को सही ठहराने की कोशिश में जुटा है। ईरान के अनुसार, इस पूरे तनाव का एकमात्र समाधान क्षेत्र में जारी युद्ध को पूरी तरह समाप्त करना और ईरान के बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाना है। इस बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए जाने वाले संभावित सैन्य हमले को कुछ समय के लिए टालने का फैसला किया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब और कतर जैसे मित्र देशों ने उनसे कूटनीतिक बातचीत के लिए थोड़ा वक्त मांगा है, क्योंकि वे एक शांतिपूर्ण समझौता चाहते हैं, हालांकि वे ईरान के अड़ियल रवैये से खासे असहज हैं।
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