मऊगंज: मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आने के बाद पूरे प्रशासनिक और सामाजिक हलके में हड़कंप मच गया है। यहाँ के शाहपुर थाना परिसर के भीतर बनाई गई एक रील इंटरनेट पर तेजी से प्रसारित हो रही है, जिसने सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वायरल वीडियो में कुछ युवक थाने के मुख्य भवन के अंदर से बेहद रौबदार और दबंग अंदाज में बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को और ज्यादा असरदार बनाने के लिए उसमें फिल्मी स्टाइल, स्लो मोशन इफेक्ट्स और बैकग्राउंड में गैंगस्टर संस्कृति को बढ़ावा देने वाले एक कड़े ऑडियो का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी वजह से यह मामला अब गंभीर रूप अख्तियार कर चुका है।

गंभीर कानूनी धाराओं के ऑडियो से बढ़ा विवाद

इस वायरल रील की संवेदनशीलता इसलिए और अधिक बढ़ गई है क्योंकि इसके बैकग्राउंड में बज रहे ऑडियो में भारतीय कानून की सबसे गंभीर धाराओं, जैसे हत्या (302) और हत्या के प्रयास (307) का खुलेआम जिक्र किया गया है। इसके अलावा वीडियो के माध्यम से जेल जाने जैसी कृत्य को समाज में एक "रुतबा" और "सम्मान" के प्रतीक के रूप में दिखाने की बेहद गैर-जिम्मेदाराना कोशिश की गई है। स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि इंटरनेट पर परोसा जा रहा ऐसा कंटेंट न सिर्फ नई उम्र के युवाओं में कानून के प्रति डर को खत्म करता है, बल्कि अपराध की दुनिया को एक स्टाइल सिंबल बनाकर समाज के सामने पेश कर रहा है।

कानून के पहरेदारों के बीच रीलबाजी पर खड़े हुए तीखे सवाल

जिस थाना परिसर को आम जनता की सुरक्षा, न्याय और कड़े अनुशासन का केंद्र माना जाता है, वहां इस तरह के आपत्तिजनक वीडियो की शूटिंग होना सीधे तौर पर पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि आखिर इतनी सुरक्षित और संवेदनशील जगह पर बाहरी युवकों को ऐसी रील बनाने की अनुमति कैसे मिल गई। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस पूरी गतिविधि के दौरान वहां मौजूद पुलिसकर्मी अनजान बने रहे या फिर यह स्थानीय थाने की सुरक्षा व्यवस्था में हुई कोई बहुत बड़ी लापरवाही का नतीजा है।

सोशल मीडिया पर भड़का यूज़र्स का गुस्सा और बढ़ा आक्रोश

वीडियो के विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलते ही इंटरनेट यूज़र्स ने इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देते हुए अपनी गहरी नाराजगी दर्ज कराई है। अधिकांश लोगों ने इसे समाज के लिए एक घातक और खतरनाक ट्रेंड बताते हुए "अपराध का खुला महिमामंडन" करार दिया है। लोगों का कहना है कि आज के दौर में चंद लाइक्स, व्यूज और फॉलोअर्स बटोरने की अंधी दौड़ में युवा पीढ़ी इस कदर अंधी हो चुकी है कि उसे न तो कानून का खौफ है और न ही सामाजिक मर्यादाओं की कोई परवाह।

युवाओं को गर्त में धकेलती खतरनाक गैंगस्टर संस्कृति

समाजशास्त्रियों और विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दुनिया में इन दिनों गैंगस्टर लाइफस्टाइल वाली रीलों का चलन डराने वाले स्तर तक बढ़ चुका है। सिनेमाई किरदारों और नकारात्मक छवियों से प्रभावित होकर देश का युवा वर्ग असल जिंदगी में भी उसी हिंसक और बागी छवि को अपनाने की होड़ में लगा है। हत्या, मार-धाड़ और जेल की सलाखों को "एटीट्यूड" तथा बहादुरी का नाम देकर रीलों में पेश करना आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिहाज से एक अत्यंत चिंताजनक संकेत है।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उठने लगी मांग

इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय जनता और सामाजिक संगठनों ने पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों से इस मामले में तुरंत दखल देने की अपील की है। लोगों ने पुरजोर मांग की है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार थाना प्रभारियों और रील बनाने वाले युवकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। जनता का तर्क है कि यदि थानों जैसी जगहों पर ही अपराधियों जैसी मानसिकता का प्रदर्शन होने लगेगा, तो समाज के भीतर कानून का इकबाल और पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर क्या कड़ा कदम उठाता है।