उज्जैन। वैश्विक स्तर पर उपजे गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से की गई अपील का व्यापक असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। पीएम की इस मुहिम से अब सिर्फ राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक मंच भी जुड़ने लगे हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में चल रही एक श्रीमद्भागवत कथा के दौरान श्रद्धालुओं को देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए पेट्रोल-डीजल का उपयोग घटाने और आगामी एक वर्ष तक नया सोना (स्वर्ण) न खरीदने का सामूहिक संकल्प दिलाया गया है।

सिंधी भाषा में हो रहा है ज्ञान यज्ञ का आयोजन

यह अनोखा और प्रेरणादायी मामला उज्जैन के जीवाजीगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ थाने के ठीक सामने स्थित संत लीलाशाह कॉन्वेंट हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में सिंधी भाषा में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। बीती 17 मई से प्रारंभ हुई यह संगीतमय कथा आगामी 23 मई 2026 तक चलेगी। कथा के दूसरे दिन व्यासपीठ से राष्ट्रहित में श्रद्धालुओं को शपथ दिलाकर प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान को अमलीजामा पहनाने की अपील की गई।

साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर जोर

सिंधी भाषा में हो रही इस कथा का वाचन करने के लिए महाराष्ट्र के अमरावती से सुप्रसिद्ध कथाव्यास डॉ. संतोष महाराज उज्जैन पहुँचे हैं। कथा के प्रसंग के दौरान उन्होंने राष्ट्रभक्ति का संदेश देते हुए सभी भक्तों से आग्रह किया कि वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता को कम से कम करें। डॉ. संतोष महाराज ने श्रद्धालुओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें अधिक से अधिक साइकिल और ई-व्हीकल (इलेक्ट्रिक वाहनों) का प्रयोग करना चाहिए, ताकि कच्चे तेल के आयात पर होने वाले देश के भारी-भरकम खर्च और आर्थिक बोझ को कम किया जा सके।

मध्य पूर्व के युद्ध से वैश्विक तेल आपूर्ति संकट, भारत पर असर

दरअसल, मिडिल ईस्ट एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग के कारण पूरी दुनिया में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी लगातार विभिन्न सार्वजनिक मंचों से देश की जनता से ईंधन बचाने की मार्मिक अपील कर रहे हैं। पीएम का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, लेकिन इस युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रधानमंत्री ने इस मिडिल ईस्ट संकट को मौजूदा दशक की सबसे बड़ी चुनौती करार दिया है।

गौरतलब है कि इस वैश्विक तनाव का असर देश की जनता पर भी दिखने लगा है; पिछले 5 दिनों के भीतर दो बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा किया जा चुका है। मंगलवार को ही देशभर में ईंधन के नए और महंगे रेट लागू हुए हैं। ऐसे में धार्मिक मंचों से शुरू हुई यह बचत की मुहिम आने वाले दिनों में आम जनता को बढ़ती महंगाई से लड़ने और देश को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने में मददगार साबित हो सकती है।