3 साल बाद कर्नाटक में सियासी सरगर्मी, क्या बदलेंगे मुख्यमंत्री?
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर कयासों का बाजार गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सरकार के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने के मौके पर सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर अंदरूनी हलचल अचानक तेज हो गई है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा उस समय और तेज हो गई जब मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले चार वरिष्ठ मंत्रियों ने बंद कमरे में एक अहम बैठक की। इस मुलाकात के बाद से ही राज्य में संभावित कप्तानी बदलाव को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
चार मंत्रियों की 'ब्रेकफास्ट मीटिंग' और राजन्ना का बयान
सतीश जरकीहोली के आवास पर हुई इस मुलाकात को भले ही अनौपचारिक बताया जा रहा हो, लेकिन इसके सियासी मायने गहरे निकाले जा रहे हैं:
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दिग्गजों का जमावड़ा: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्री एचसी महादेवप्पा, बीजेड ज़मीर अहमद खान, के वेंकटेश और लोक निर्माण मंत्री सतीश जरकीहोली ने मंगलवार सुबह बैठक की। हालांकि, ज़मीर अहमद खान ने किसी भी 'गुप्त बैठक' से इनकार करते हुए कहा कि वे सभी नेता सिर्फ नाश्ते पर मिले थे।
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विधायक के बयान ने घी का काम किया: यह बैठक कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केएन राजन्ना के उस बयान के ठीक बाद हुई, जिसमें उन्होंने साफ कहा था कि यदि पार्टी हाईकमान नेतृत्व परिवर्तन पर विचार करता है, तो मुख्यमंत्री पद के लिए गृह मंत्री जी परमेश्वर के नाम पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
सीएम की रेस में जी परमेश्वर का नाम भी हुआ शामिल
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वर का नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में प्रमुखता से उभर कर सामने आया है:
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मजबूत राजनीतिक कद: दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले परमेश्वर लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं, जिससे संगठन में उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।
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सिद्धारमैया ने की तारीफ: तुमकुरु में आयोजित सरकार के तीन साल पूरे होने के कार्यक्रम के दौरान खुद सीएम सिद्धारमैया ने परमेश्वर की भूमिका की खुलकर तारीफ की, जिसने चर्चाओं को और हवा दे दी है।
डीके शिवकुमार का तिरुपति दौरा और 30 महीने का फॉर्मूला
दूसरी तरफ, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की गतिविधियों ने भी राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है:
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ऐन वक्त पर मंदिर दर्शन: तुमकुरु के मुख्य सरकारी कार्यक्रम से ठीक कुछ घंटे पहले डीके शिवकुमार का अचानक तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचना राजनीतिक हलकों में कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है।
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ढाई साल का फॉर्मूला: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के कार्यकाल के 30 महीने (ढाई साल) पूरे होने के बाद से ही डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उनके गुट द्वारा लगातार की जा रही है।
हाईकमान की चुप्पी और समर्थकों की लामबंदी
फिलहाल दिल्ली में बैठे कांग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक के इस शक्ति प्रदर्शन और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है और न ही कोई आधिकारिक संकेत दिया है। सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार दोनों ही नेता यह बयान दे चुके हैं कि वे आलाकमान के हर फैसले को सहर्ष स्वीकार करेंगे। इसके बावजूद, पर्दे के पीछे दोनों ही खेमों के समर्थक अपने-अपने नेता की दावेदारी को मजबूत करने और सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी ताकत से लामबंद हो चुके हैं।
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