Financial Fraud Case: कमलेश पारेख प्रत्यर्पण, CBI की बड़ी कार्रवाई
CBI की बड़ी स्ट्राइक: बैंक घोटाले का आरोपी कमलेश पारेख और फर्जी पासपोर्ट गिरोह का सरगना यशपाल यूएई से प्रत्यर्पित
नई दिल्ली। इंटरपोल और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से भारत ने 1 मई को दो बड़े वांछित अपराधियों को अपनी हिरासत में ले लिया है। दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुँचते ही सीबीआई की टीम ने इन्हें अपनी गिरफ्त में ले लिया।
1. कमलेश पारेख: करोड़ों के बैंकिंग घोटाले का मास्टरमाइंड
लंबे समय से विदेश में छिपे कमलेश पारेख के खिलाफ सीबीआई ने इंटरपोल के जरिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया था।
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बैंकों से धोखाधड़ी: पारेख पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले कई बैंकों के समूह के साथ सैकड़ों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है।
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फंड की हेराफेरी: जांच में खुलासा हुआ कि उसने अन्य प्रमोटरों के साथ मिलकर बैंकों से मिली राशि को विदेशी कंपनियों में डायवर्ट किया। इसके लिए फर्जी निर्यात और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन का सहारा लिया गया।
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अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क: आरोपी ने यूएई समेत कई देशों में फैले अपने व्यापारिक संपर्कों का इस्तेमाल कर इस घोटाले को अंजाम दिया था।
2. आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह: फर्जी पासपोर्ट रैकेट का मुखिया
CBI ने यूएई से ही एक अन्य वांछित आरोपी आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह को भी भारत लाया है।
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संगठित अपराध: हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज मामले के अनुसार, आलोक एक ऐसे गिरोह का संचालन करता था जो जाली दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाता था।
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अपराधियों की मदद: आरोप है कि उसने फर्जी नाम और पते का इस्तेमाल कर कई आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को देश से बाहर भागने के लिए अवैध रूप से पासपोर्ट उपलब्ध कराए।
कैसे सफल हुआ यह मिशन?
यह पूरी कार्रवाई विदेश मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का परिणाम है:
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भारतपोल प्लेटफॉर्म: सीबीआई, जो भारत में इंटरपोल के लिए नोडल एजेंसी है, अपने 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म के जरिए वैश्विक स्तर पर अपराधियों को ट्रैक कर रही है।
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रिकॉर्ड प्रत्यर्पण: पिछले कुछ वर्षों में भारत इस समन्वय के जरिए अब तक 150 से अधिक वांछित अपराधियों को वापस लाने में सफल रहा है।
अगली कार्रवाई
सीबीआई अब दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ करेगी। कमलेश पारेख से बैंक घोटाले की डूबी हुई रकम की रिकवरी और इस नेटवर्क में शामिल अन्य सफेदपोशों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। वहीं, आलोक कुमार से फर्जी पासपोर्ट गिरोह के अन्य सदस्यों और उन अपराधियों के बारे में पूछताछ होगी जिन्होंने इस गिरोह की मदद ली थी।
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