क्या कुंवारी कन्या रख सकती हैं हरतालिका तीज का व्रत?
हिंदू धर्म में महिलाओं के लिए कई ऐसे व्रत हैं जो अखंड सौभाग्य की कामना से रखे जाते हैं. जैसे हरियाली तीज, कजरी तीज और करवाचौथ, ये सभी व्रत सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए रखती हैं. इन सभी व्रतों में हरतालिका तीज के व्रत को सबसे कठिन माना जाता है. ऐसे में बहुत सी कुंवारी कन्याओं के मन में विचार आता है कि इस व्रत को कर सकती हैं या नहीं?
कब मनाई जाएगी हरतालिका तीज?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 25 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट के लगभग पर प्रारंभ होगी और 26 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 54 मिनट के लगभग पर समाप्त होगी. हरतालिका तीज पूजन का सुबह के समय शुभ मुहूर्त सुबह 05 बजकर 56 मिनट से सुबह 08 बजकर 31 मिनट तक रहेगा.
कुंवारी कन्या को व्रत रखने के लाभ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन का प्रतीक है. ऐसा माना जाता है कि कुंवारी लड़कियां यदि यह व्रत करती हैं तो उन्हें योग्य जीवनसाथी का आशीर्वाद मिलता है. यह व्रत करने से अच्छे विवाह योग बनते हैं और भविष्य में सुखी दांपत्य जीवन की कामना पूरी होती है.
पहली बार रखने जा रहीं व्रत तो जानें नियम
– हरितालिका तीज के दिन कुंवारी लड़कियां व्रत रखते समय सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. फिर, भगवान शिव-पार्वती के समक्ष व्रत का संकल्प लें.
– हरितालिका तीज व्रत को कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, इस व्रत के दिन जल ग्रहण नहीं किया जाता, निर्जला व्रत होने के कारण ही हर कोई इसे नहीं ले पाता, इसलिए अगर आप पहली बार यह व्रत रखने वाली हैं, तो कुछ दिन पहले से ही खुद को मानसिक रूप से तैयार रखें.
– इस व्रत का आरंभ सूर्योदय से पहले होता है, महिलाएं स्नान करके साफ वस्त्र इस दिन धारण करती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करती हैं.
– पूजा के दौरान व्रत लेने वाली महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्तियों का विधिवत पूजन करती हैं. साथ ही, उन्हें पुष्प, धूप, दीप, चंदन, अक्षत, फल और मिठाई आदि अर्पित करती हैं.
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