ईरान-ट्रंप टकराव बढ़ा, अल्टीमेटम से सीजफायर पर संकट
तेहरान/वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब 'आर-पार' की जंग में तब्दील होती दिख रही है। शांति वार्ता की मेज पर सन्नाटा पसरा होने के बीच ईरान ने ट्रंप प्रशासन को सीधे शब्दों में 48 घंटे की समय सीमा (Ultimatum) दे दी है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका वार्ता में जानबूझकर देरी कर रहा है ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को और चोट पहुँचाई जा सके।
11 ट्रिलियन डॉलर का 'महा-विवाद'
दोनों देशों के बीच गतिरोध की सबसे बड़ी दीवार वह 11 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 900 लाख करोड़ रुपये) की ईरानी संपत्ति है, जिसे अमेरिका ने फ्रीज कर रखा है।
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ईरान का दावा: जब तक यह भारी-भरकम राशि जारी नहीं की जाती और ईरानी बंदरगाहों से प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक बातचीत का कोई अर्थ नहीं है।
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अमेरिका का रुख: फिलहाल वाशिंगटन ने इन संपत्तियों को मुक्त करने के बदले कई कड़े समझौते की शर्तें रखी हैं, जिस पर सहमति नहीं बन पाई है।
"हवा नहीं, आग बरसेगी": विदेश मंत्री की चेतावनी
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सख्त लहजे में कहा कि यदि अगले दो दिनों के भीतर संपत्तियों को लेकर कोई ठोस लिखित प्रस्ताव नहीं मिलता, तो वर्तमान सीजफायर (युद्धविराम) स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा:
"अगर हमारी संपत्तियां हमें वापस नहीं मिलती हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करना हमारा अगला कदम होगा। दुनिया को अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए अमेरिका की जिद की कीमत चुकानी पड़ सकती है।"
दुनिया पर क्या होगा असर?
होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी भूकंप से कम नहीं होगा:
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तेल की कीमतें: दुनिया का लगभग 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
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वैश्विक मंदी का खतरा: ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे वैश्विक महंगाई दर में भारी उछाल आ सकता है।
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युद्ध की आशंका: यदि ईरान होर्मुज को बंद करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं, जिससे मध्य पूर्व में एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत हो सकती है।
कूटनीति के लिए आखिरी 48 घंटे
फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या ट्रंप प्रशासन ईरान की शर्तों के आगे झुकेगा या फिर यह अल्टीमेटम एक नए संघर्ष का बिगुल फूंकेगा? अगले 48 घंटे वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक होने वाले हैं।
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