तौसीफ मर्डर केस में नया मोड़, जांच में सामने आई अलग कहानी
बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में बिहार के एक मौलाना की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। मृतक मौलाना तौसीफ रजा की पत्नी तबस्सुम खातून ने पुलिस के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि उनके पति ट्रेन के गेट से गिरकर हादसे का शिकार हुए। सोमवार को परिजनों और स्थानीय संगठनों के साथ जीआरपी थाने पहुंचीं तबस्सुम ने आरोप लगाया कि उनके पति की मौत कोई दुर्घटना नहीं बल्कि एक सोची-समझी हत्या है, जिसका आधार उनकी मजहबी पहचान और नफरत है।
वीडियो कॉल पर देखी हमले की खौफनाक मंजर
मौलाना की पत्नी ने अत्यंत विचलित करने वाले खुलासे करते हुए बताया कि घटना वाली रात उनके पति का फोन आया था जिसमें उन्होंने कोच के भीतर कुछ लोगों द्वारा बेवजह पीटे जाने की बात कही थी। तबस्सुम के अनुसार, जब उन्होंने वीडियो कॉल की तो स्क्रीन पर साफ दिख रहा था कि कुछ अराजक तत्व उनके पति को घसीट रहे थे और उन पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर मारपीट कर रहे थे। इसी दौरान अचानक स्क्रीन पर अंधेरा छा गया और फोन बंद हो गया, जिसके बाद अगले दिन उनका शव पालपुर रेलवे क्रॉसिंग के पास ट्रैक पर बरामद हुआ।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और शिनाख्त से जुड़े तथ्य
पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौलाना तौसीफ के सिर की दो हड्डियां टूटी हुई पाई गई हैं और शरीर पर चोट व रगड़ के पांच निशान मिले हैं। पुलिस को शव के पास मिले बैग से आधार कार्ड, पैनकार्ड, कुछ धार्मिक पुस्तकें और नकदी बरामद हुई थी, जिससे उनकी पहचान किशनगंज निवासी के रूप में की गई। हालांकि रेलवे पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि उनका सिर ट्रैक के पास लगे खंभे से कैसे टकराया, लेकिन परिजनों का दावा है कि उन्हें चलती ट्रेन से धक्का देकर खंभे की तरफ फेंका गया था।
न्याय की मांग और संगठनों का कड़ा विरोध
इस घटना को लेकर मुस्लिम संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है। ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस और जमात रजा-ए-मुस्तफा जैसे संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर दोषियों की 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता व सरकारी नौकरी देने की अपील की है। अपनी शादी की दूसरी सालगिरह से महज कुछ दिन पहले विधवा हुई तबस्सुम ने संकल्प लिया है कि जब तक उनके पति के हत्यारों को सजा नहीं मिल जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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