प्रशांत सिंह की नौकरी पर सवाल, भाई के बयान से मचा हड़कंप
लखनऊ|मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सम्मान में इस्तीफा देकर चर्चा में आए अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर (GST) प्रशांत कुमार सिंह विवादों के घेरे में आ गए हैं। उन पर किसी और ने नहीं, बल्कि उनके भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। भाई का दावा है कि प्रशांत सिंह ने फर्जी 'दिव्यांग प्रमाणपत्र' (Disability Certificate) के सहारे यह सरकारी नौकरी हासिल की थी। प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार को यह कहते हुए इस्तीफा दिया था कि वे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा सीएम योगी आदित्यनाथ पर की गई 'औरंगजेब' वाली टिप्पणी से आहत हैं। उन्होंने कहा था कि जिस प्रदेश का वे नमक खाते हैं, उसके मुखिया का अपमान वे बर्दाश्त नहीं कर सकते।प्रशांत सिंह के भाई विश्वजीत सिंह के मुताबिक, इस्तीफा देना कोई नैतिक कदम नहीं बल्कि एक सोची-समझी चाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशांत को डर था कि उनके फर्जीवाड़े की पोल खुलने वाली है, इसलिए जांच और अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी से बचने के लिए उन्होंने 'इस्तीफे का ड्रामा' रचा है। फर्जीवाड़े के आरोप में उन पर जेल जाने का भी खतरा है।
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2021 से चल रही है शिकायत
विश्वजीत ने बताया किया कि उन्होंने 2021 में ही इस फर्जीवाड़े की शिकायत की थी। अगस्त 2021 में जब मंडलीय चिकित्सा परिषद ने प्रशांत सिंह को मेडिकल बोर्ड के सामने परीक्षण के लिए बुलाया, तो वे दो बार गैरहाजिर रहे। भाई का दावा है कि प्रशांत ने आंख की जिस बीमारी के आधार पर दिव्यांग सर्टिफिकेट बनवाया है, वह बीमारी 50 साल से कम उम्र के व्यक्ति को होना विज्ञान के हिसाब से असंभव है।
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सीएमओ मऊ ने शुरू की जांच
भाई द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) मऊ ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। सीएमओ डॉ. संजय कुमार गुप्ता ने बताया कि जीएसटी अधिकारी प्रशांत सिंह के खिलाफ उनके ही भाई विश्वजीत सिंह ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र पर नौकरी पाने की शिकायत की थी। उसी आधार पर 28 सितंबर 2021 और सात अक्तूबर 2021 को नोटिस जारी किया गया था।प्रशांत सिंह को मंडलीय बोर्ड आजमगढ़ के सामने पेश होने के लिए कहा गया था। लेकिन प्रशांत ने दोनों नोटिसों को गंभीरता से नहीं लिया और न बोर्ड के सामने पेश हुए। सीएमओ के मुताबिक पूरी रिपोर्ट अयोध्या आयुक्त को भेजी गई है। इस मामले में आगे उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार जांच कर कार्रवाई की जाएगी। यदि दिव्यांग प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो प्रशांत सिंह पर न केवल कानूनी कार्रवाई होगी, बल्कि उन्हें अब तक मिले आर्थिक लाभ की वसूली का सामना भी करना पड़ सकता है।
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