पीएम मोदी के द्वारा लोकार्पित सुदर्शन सेतु की क्या है खासीयत
अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज रविवार को गुजरात के द्वारका में अरब सागर पर बने देश के सबसे लंबे केबल आधारित पुल ‘सुदर्शन सेतु’ का लोकार्पण किया है। यह केवल आधारित पुल स्टील और कंक्रीट की ताकत के साथ सोलर एनर्जी की बेजोड़ मिसाल बताया जाता है।
यहां आपको बतलाते चलें कि प्रधानमंत्री मोदी ने जिस सुदर्शन सेतु का लोकार्पण किया है वह आम पुलों से बेहद अलग है। इस सेतु के माध्यम से जहां वाहनों की आवाजाही और सुगम होगी वहीं द्वारका और बेट-द्वारका मार्ग के बीच यात्रा करने वाले भक्तों के लिए लगने वाले समय में भी कमी आएगी। यहां बतला दें कि पीएम मोदी दो दिन के गुजरात दौरे पर कल पहुंचे हैं। शनिवार देर रात पीएम मोदी जामनगर पहुंचे थे, जहां भव्य रोड शो में लोगों ने उनका जबरदस्त स्वागत किया। इसके बाद आज सुबह रविवार को पीमए मोदी ने बेट द्वारका मंदिर पहुंच पूर्जा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने अरब सागर पर बने देश के सबसे लंबे केबल आधारित पुल सुदर्शन सेतु का उद्घाटन किया।
गौरतलब है कि 2.32 किलोमीटर लंबा यह सेतु करीब 980 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है जो ओखा मुख्य भूमि को बेट द्वारका द्वीप से जोड़ता है। बता दें कि यह पुल कई खूबियों से लैस है। इस पुल के निर्माण को साल 2016 में केंद्र सरकार ने मंजूरी दी थी और 7 अक्टूबर 2017 को पीएम नरेंद्र मोदी ने इसकी आधारशिला रखी थी। खास बात यह भी है कि इस सेतु का लाभ लक्षद्वीप पर रहने वाले लोगों को भी मिलेगा।
सुदर्शन सेतु एक अद्वितीय डिजाइन पर बना है, जिसमें दोनों तरफ श्रीमद्भगवद गीता के श्लोकों और भगवान कृष्ण की छवियों से सुसज्जित एक पैदलपथ है। इसमें पैदलपथ के ऊपरी हिस्से पर सौर पैनल भी लगाए गए गए हैं, जिससे एक मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। इस सेतु से वाहनों की आवाजाही और सुगम होगी और द्वारका एवं बेयत-द्वारका मार्ग के बीच यात्रा करने वाले भक्तों के समय में काफी कमी करेगा।
सेतु के निर्माण से पूर्व तीर्थयात्रियों को बेयत द्वारका तक पहुंचने के लिए नौका परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता था। खराब मौसम हो जाए तो लोगों को काफी प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। यह प्रतिष्ठित सेतु देवभूमि द्वारका के प्रमुख पर्यटक आकर्षण के रूप में भी कार्य करेगा। पुल का डेक कंपोजिट स्टील-रिइनफोर्स्ड कंक्रीट से बना है जिसमें 900 मीटर का सेंट्रल डबल स्पैन केबल-स्टैंड वाला हिस्सा और 2.45 किमी लंबी एप्रोच रोड शामिल है। चार लेन वाले 27.20 मीटर चौड़े पुल की प्रत्येक साइड पर 2.50 मीटर चौड़े फुटपाथ हैं। इस पुल को सिग्नेचर ब्रिज के नाम से जाना जाता था, उसका नाम बदलकर सुदर्शन सेतु या सुदर्शन ब्रिज कर दिया गया है।
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